Kash Koi Insaniyat Day Bhi Hota

काश कोई रोटी डे होता,
तो लोग भुख से बिखलते लोगों को रोटी बांटते,
काश कोई कपडा डे होता,
तो लोग ठंड से ठिठुरते लोगों को कपडे बांटते,
काश कोई इंसानियत डे भी होता,
तो लोग इंसानियत क्या होती है समझ पाते…

2 thoughts on “Kash Koi Insaniyat Day Bhi Hota”

  1. काश कोई रोटी डे होता,
    तो लोग भुख से बिखलते लोगों को रोटी बांटते,
    काश कोई कपडा डे होता,
    तो लोग ठंड से ठिठुरते लोगों को कपडे बांटते,
    काश कोई इंसानियत डे भी होता,
    तो लोग इंसानियत क्या होती है समझ पाते…

    उपरोक्त कविता मेरे द्वारा रचित है।

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